पीएसएससीआईवीई का 26वां स्थापना दिवस कल

पं. सु. ष. केन्द्रीय व्यावसायिक षिक्षा संस्थान के साथ मिलकर म. प्र. राज्य को स्किल्ड स्टेट बनाएंगे। यह बात एम.पी. स्किल डेवलपमेंट एंड एम्पलायमेन्ट जेनरेषन बोर्ड के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री जी. एन. अग्रवाल ने कही। वे पीएसएससीआईवीई के 26वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन ष्यामला हिल्स स्थित पीएसएससीआईवीई के ऑडिटोरियम ’’निनाद’’ में किया गया था। आगे श्री अग्रवाल जी ने कहा कि एनएसक्यूएफ के अंतर्गत पाठ्यचर्या एवं पाठ्यपुस्तकों का जो निर्माण पीएसएससीआईवीई द्वारा एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा किया गया वह अत्यंत आवष्यक और प्रसंषनीय है। एम.पी. स्किल डेवलपमेंट बोर्ड और पीएसएससीआईवीई एक ही उददेष्य के लिए कार्य कर रहे हैं। स्थानीय एवं परम्परागत कला को बढ़ावा मिल सके और प्रदेष के युवा इसमें पारंगत हो सके, इसके लिए हमें मिलकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रदेष में कौषल विकास के जो कोर्स संचालित हो रहे हैं, उनमें युवाओं की रूचि कम है तथा प्रषिक्षित षिक्षकों की भी कमी है, जिसे पूरा करने की जरूरत है। साथ ही कुषल युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया करना भी जरूरी है, जिससे उनका इन पाठ्यक्रमों की ओर रूझान बढ़ सके।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पीएसएससीआईवीई के संयुक्त निदेषक प्रो. राजेष पुं. खंबायत ने कहा कि हमें 21वीं षताब्दी का भारत बनाना है, जिसमें कौषल विकास और व्यावसायिक षिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान देंगे। इस दिषा में पीएसएससीआईवीई लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने संस्थान की अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि संस्थान ने वर्ष 2018-19 में पांच रिसर्च प्रोजेक्ट, 11 डेवेलपमेंट प्रोजेक्ट, 45 ट्रेनिंग प्रोग्राम व अन्य दस एक्सटेंषन प्रोग्राम आयोजित किए। संस्थान के द्वारा विगत चार वर्षों के सतत् प्रयासों के परिणामस्वरूप 18 विभिन्न सेक्टर जैसे कि- एग्रीकल्चर, ईलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर, हेल्थ केयर, टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी, एपेरल, टैक्सटाइल, लॉजिस्टिक, पॉवर, आईटीईएस, बीएफएसआई, रिटेल, सिक्योरिटी आदि से संबंधित 100 जॉबरोल के लिए लर्निंग ऑउटकम बेस्ड, 100 करिकुलम बनाए हैं। इन करिकुलम से तैयार पुस्तकों में से 19 पुस्तकें एनसीईआरटी के द्वारा प्रकाषित की जा चुकी है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि संस्थान में विगत वर्ष तीन अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक आयोजन किया। साथ ही व्यावसायिक षिक्षा के क्षेत्र में बेहतर क्रियान्वयन के उददेष्य से चार क्षेत्रीय बैठक व एक राष्ट्रीय बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के द्वारा विकसित व एनसीईआरटी द्वारा प्रकाषित 19 पुस्तकों का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया। इन पुस्तकों में मुख्य रूप से षामिल है- इम्प्लाइबिलिटी स्किल्स, सेल्स एसोषिएट, केषियर, विजन टेक्नीषियन, हेंड एम्ब्रायडरी, अड््डा वाला, प्लम्बर, जनरल ड्यूटी असिसटेन्ट आदि।

इसके उपरान्त संस्थान द्वारा निर्मित तीन फिल्मों क्रमषः ‘‘एम्पलाइबिलिटी स्किल्स एसेन्सियल फॉर वर्क प्लेस’’, इंस्टीट्यूट फिल्म ऑन ‘‘पीएसएससीआईवीई-ग्लोरियस पास्ट-टू-इनस्पॉइरिंग फ्यूचर’’, ‘‘हुनर सीखे-होनहार बने’’ भी विमोचन एवं प्रदर्षन किया गया। इस अवसर पर संस्थान की अकादमिक गतिविधियों से संबंधित ‘‘प्रोग्राम कैटलॉग 2019-20’’ भी जारी किया गया।

क्षेत्रीय षिक्षा संस्थान भोपाल के प्राचार्य प्रो. एन. प्रधान ने ‘‘इंडिया कोरियन वोकेषनल एजुकेषनल प्रोजेक्ट’’ के बारे में बताते हुए कहा कि कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों के लिए चार हजार घंटों के व्यावसायिक पाठ्यक्रम जो इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत तैयार किए गए हैं उन्हें डीएमएस स्कूल भोपाल में लागू किया जाएगा। प्रो. प्रधान ने बताया कि जो नई कौषल षिक्षा नीति है, उसके अनुसार सभी स्कूलों में एवं उच्च षिक्षा में वोकेषनल एजुकेषन के पाठ्यक्रम में षामिल किया जाना है। कार्यक्रम के दौरान डीएम स्कूल के व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने वाले छात्र-छात्राओं को प्रषस्ति पत्र एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान दूसरे सत्र में बी.एस.एस. कॉलेज के सहायक प्राध्यापक सैयद आमिर मेहबूब प्रेरणादायक व्याख्यान बिलिविंग इन यूरसेल्फ विषय पर दिया गया। इसके पष्चात पैनल चर्चा विषय ‘‘बिल्डिंग क्वॉलिटी वोकेषनल एजुकेषन एंड ट्रेनिंगः चैलेंजेस एंड पर्सपेक्टिव्स’’ में एन. आई. टी. टी. टी. आर. के प्रो. आर. बी. षिवगुंडे, बी. एस. एस. कॉलेज की षिक्षा विभाग की प्रमुख डॉ. षीना जोसफ, आईसेक्ट के निदेषक श्री सिद्धार्थ चतुर्वेदी, आइसर टै्रक्टर के श्री पार्थ एस. बासु एवं पीएसएससीआईवीई के प्रो. सौरभ प्रकाष मौजूद थे। कार्यक्रम के अंत में प्रो. व्ही. एस. मेहरोत्रा ने सभी अतिथियों का उनकी गरिमामयी उपस्थिति एवं मार्गदर्षन के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ सौरभ प्रकाष द्वारा किया गया।